पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे राम, भरत मिलाप के बाद हुआ राजतिलक, कलाकार सम्मानित
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : काशीरामपुर तल्ला में आयोजित रामलीला का भगवान श्रीराम के राजतिलक के साथ विधिवत समापन हो गया। अंतिम दिन मंच पर लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम के सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटने, भरत मिलाप और राजतिलक के भावपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

सिद्धबली मार्ग स्थित बाल रामलीला कमेटी के मंच पर आयोजित रामलीला के शुभारंभ अवसर पर डॉ. अरुण मिश्रा, डॉ. सौरव मिश्रा, कांवड़ सेवा समिति के अध्यक्ष पूर्णचंद पुरी और वीरेंद्र नामदेव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया। रामलीला के प्रारंभिक प्रसंगों में राजा दशरथ की संतान प्राप्ति की चिंता, श्रृंगी ऋषि द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराए जाने और इसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न के जन्म का मंचन किया गया। चारों भाइयों के नामकरण के प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद मुनि विश्वामित्र के आश्रम में सुबाहु और मारीच द्वारा उत्पात मचाने का दृश्य दिखाया गया। राक्षसों से ऋषियों की रक्षा के लिए विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाते हैं। मार्ग में भगवान राम द्वारा ताड़का वध का भी प्रभावी मंचन किया गया। रामलीला के अंतिम दिन भगवान श्रीराम के लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटने का दृश्य मंचित किया गया। अयोध्यावासियों ने फूलों की वर्षा कर भगवान श्रीराम का स्वागत किया। इसके बाद राम-भरत मिलाप का भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। अंत में भगवान श्रीराम को मुकुट पहनाकर उनका राजतिलक किया गया। राजतिलक के साथ ही रामलीला का समापन हुआ। इस दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। रामलीला कमेटी की ओर से मंचन में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर संजय मित्तल, ओमप्रकाश भाटिया, नितिन गुप्ता, विनय भाटिया, सुशील जैन, सुरेश गोयल, अजय कश्यप, मीना सेमवाल, कुसुम मोंगिया, डॉ. घनानंद शर्मा, कमेटी अध्यक्ष कांति तिवारी, विवेक बनियाल, सोहन लाल गुप्ता, संजीव थपलियाल, सुरेशानंद देवली, रघुवीर सिंह ठाकुर, नारायण सिंह भंडारी, लक्ष्मी नेगी, अनीता शर्मा और मालती बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।