सुखरो देवी मंदिर समिति को हाईकोर्ट से राहत, पुनर्विचार याचिका खारिज

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पौराणिक सिद्धपीठ सुखरो देवी मंदिर की संपत्ति और मंदिर समिति को लेकर चल रहे विवाद में मंदिर समिति को राहत मिली है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मई में दिए गए फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। समिति ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे तथ्यों की जीत बताया।


मंदिर की संपत्ति को लेकर पिछले वर्ष छह सितंबर को दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शांति भंग की आशंका जताई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ बीएनएस की धारा 164 के तहत चालान कर रिपोर्ट एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत की थी। इसके बाद 11 सितंबर को प्रशासन ने मंदिर से संबंधित संपत्तियों को सील कर दिया था। प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ मंदिर समिति के अध्यक्ष राजाराम अण्थ्वाल ने हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मई में प्रशासन को सील की गई संपत्तियों की चाबियां मंदिर समिति को सौंपने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ दूसरे पक्ष की ओर से हाईकोर्ट की डबल बेंच में पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजाराम अण्थ्वाल ने बताया कि डबल बेंच ने पूर्व में दिए गए निर्णय को उचित मानते हुए पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने मामले के वास्तविक तथ्यों के आधार पर निर्णय दिया है। उनके अनुसार न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और समिति अब मंदिर की व्यवस्थाओं एवं विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेगी। मंगलवार को समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। इस दौरान आतिशबाजी कर खुशी जताई गई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि अब मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम किया जाएगा। इस अवसर पर विजय ध्यानी, मोहन सिंह, वीरेंद्र सिंह रावत, सत्यप्रकाश भारद्वाज, कालिका प्रसाद नैथानी, विपिन चंद्र, रविंद्र चौहान, मनोज द्विवेदी, सुदामा प्रसाद, अर्जुन सिंह, अजीत सिंह, गणेश डबराल और कोमल सजवाण मौजूद रहे।

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