जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कोर जोन में बसे तैड़िया गांव के ग्रामीणों ने विस्थापन प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सर्वसम्मति से सहमति जताई है। ग्रामीणों ने शासन और वन विभाग से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की गाइडलाइन के अनुरूप मूलभूत सुविधाओं के साथ विस्थापन प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

रविवार को कोटद्वार में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी ने कहा कि कठोर वन कानूनों के कारण गांव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी वन विभाग से अनुमति लेने में ग्रामीणों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विस्थापन के पक्ष में हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया में ग्रामीणों के हितों और मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। बैठक में ग्रामीणों ने विस्थापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक कोर कमेटी का गठन भी किया। इसमें विनीता ध्यानी को अध्यक्ष, राधाबल्लभ को सचिव, धर्मानंद ध्यानी को कोषाध्यक्ष, शक्तिधर प्रसाद को उपाध्यक्ष, सुषमा ध्यानी जखमोला को महिला उपाध्यक्ष और डा. अंबिका प्रसाद को मीडिया प्रभारी बनाया गया। भगवती प्रसाद को संयोजक, गुणानंद को संरक्षक और अशोक कुमार को आय-व्यय निरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई। ग्रामीण प्रतिनिधियों के रूप में भगवती प्रसाद, सुनील कुमार, सोहन लाल, वेदप्रकाश और दिनेश चंद्र मनीष को भी जिम्मेदारी सैंपी गई। ग्रामीणों ने गांव की मौजूदा स्थिति के लिए शासन-प्रशासन और वन विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे उचित शर्तों और आवश्यक सुविधाओं के साथ विस्थापन चाहते हैं। उनका कहना है कि विस्थापन के बाद पुनर्वास स्थल पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।