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पीएम की सुरक्षा में चूक मामला: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय कमेटी ने शुरू की जांच, रैली स्थल पर भी पहुंची टीम

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फिरोजपुर , एजेंसी। पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक के एक महीने बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी पहली बार घटना स्थल फिरोजपुर पहुंची। यहां पहुंचने के बाद टीम ने हर स्तर से जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा टीम फिरोजपुर में रैली स्थल पर भी पहुंची। बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने सुरक्षा चूक की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में 12 जनवरी को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था।
न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने फिरोजपुर में जनसभा के लिए जाते समय उस फ्लाईओवर का निरीक्षण किया जिस पर प्रधानमंत्री करीब 15 से 20 मिनट तक फंसे रहे। वह उस जगह भी गई जहां रैली होनी थी। न्यायमूर्ति मल्होत्रा के साथ चंडीगढ़ के डीजीपी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आईजी, पंजाब के एडीजीपी सुरक्षा और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल भी थे। गौरतलब है कि पीएम के दौरे से जुड़ा पूरा रिकर्ड पहले ही कमेटी के पास पहुंच चुका है।
पिछले महीने प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक के बाद केंद्र और पंजाब सरकार ने अलग-अलग जांच शुरू की थी। पंजाब सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस मेहताब सिंह गिल और गृह सचिव अनुराग वर्मा की कमेटी बनाई। जबकि केंद्र ने इंटेलिजेंस ब्यूरो और एसपीजी अधिकारियों के साथ सुरक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक जांच समिति भी बनाई थी।
पांच जनवरी को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फिरोजपुर में दौरा था। भारी बारिश के कारण पीएम को सड़क मार्ग से जाना पड़ा लेकिन इस दौरान हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर रास्ते में प्रदर्शनकारी मिल गए जिस कारण उनका काफिला तकरीबन 20 मिनट बेहद असुरक्षित क्षेत्र में रुका रहा। जिस इलाके में पीएम मोदी का काफिला रुका था, वह आतंकियों के अलावा हेरोइन तस्करों का गढ़ माना जाता है। पिछले साल सितंबर माह में इसी क्षेत्र में आतंकी वारदात को अंजाम दिया गया था।
गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और ट्रेवल प्लान के बारे में पंजाब सरकार को पहले ही बता दिया गया था। उन्हें इससे जुड़े इंतजाम करने थे, जो नहीं किए गए। गृह मंत्रालय ने कहा कि जब यात्रा मार्ग बदल गया तो पंजाब सरकार को अतिरिक्त सुरक्षा तैनाती करनी थी ताकि सड़क मार्ग से यात्रा सुरक्षित रहे, लेकिन अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए गए।

 

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