गाजियाबाद में उत्तराखंड मूल के लोग अपनी ताकत आजमाइश के मूड में

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। गाजियाबाद जिले में बीते तीन दशकों में उत्तराखंड मूल के लोगों की बसावट में जबरदस्त इजाफा हुआ है। दिलशाद कालोनी, श्याम पार्क, लाजपत नगर, राजेन्द्र नगर, विजयनगर, प्रताप विहार और खोड़ा कॉलोनी में तो पहाड़ के लोगों का दबदबा तो था ही अब वैशाली, इंदिरापुरम, वसुंधरा और कौशांबी में भी उत्तराखंड बहुल के लोगों की बड़ी तादाद है। पहाड़ से वास्ता रखने वाले ये लोग प्रवास में भी अपने रीति-रिवाज, तीज-त्योहारों को सामूहिकता के आधार पर मनाते रहते हैं। पहाड़ की होली हो, उतरैणी-मकरैंणी या इंदिरापुरम का महाकौथिग, पहाड़ की माटी की खुशबू और आंचलिकता की महक इन पहाड़ी आयोजनों में देखने को मिलती है।
गाजियाबाद जिले में पहाड़ के वोटर निर्णायक भूमिका में आने लग गए हैं। गाजियाबाद लोकसभा की गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी और मुरादनगर विधानसभाओं में से गाजियाबाद और साहिबाबाद विधानसभा सीटों पर उत्तराखंडी वोटर अहम भूमिका में है। उत्तराखंड मूल की सुनीता रावत रेड्डी, मीना भंडारी और अनिल राणा पार्षद की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं गाजियाबाद और साहिबाबाद विधानसभा सीट पर उत्तराखंड के लोग अब राजनीति जोर आजमाइश के मूड़ में हैं। उत्तराखंड समाज समिति महासंघ गाजियाबाद ने मेरठ रोड गाजियाबाद के नवोत्कर्ष भवन ‘अमरूद पार्टी’ का आयोजन किया। इस पार्टी में गाजियाबाद में उत्तराखंड की संस्थाओं के पदाधिकारियों, राजनीति दलों से जुड़े राजनैतिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। बीजेपी नेता और उत्तराखंड के पूर्व राज्यमंत्री सच्चिदानंद शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि राजनैतिक पार्टियां उत्तराखंड मूल के उन नेताओं को विधानसभा चुनावों में टिकट दें जो पहाड़ के समाज और दूसरे समाज के लोगों के बीच कई सालों से समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। इस अवसर पर धीरेंद्र ध्यानी को महानगर कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बनाए जाने पर, मोहन सिंह रावत को नगर निगम गाजियाबाद पार्षद मनोनीत होने पर बलवीर सिंह चौहान को खोड़ा नगर पालिका सभासद मनोनीत होने पर तथा लक्ष्मण रावत को खोड़ा भाजपा मंडल अध्यक्ष बनाए जाने पर समाज द्वारा उनका सम्मान किया गया। वहीं दूसरी ओर कोरोना कॉल में दिवंगत महासंघ के संरक्षक राजेंद्र भंडारी एवं पूर्व महामंत्री इंद्र सिंह नेगी जी के दिवंगत होने पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।
समाज के प्रबुद्ध लोगों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किसी एक पार्टी के पिछलग्गु बनने से बेहतर है कि समाज को उस पार्टी के साथ जुड़ना चाहिए जो राजनैतिक पार्टी वृहत समाज को अवसर देना चाहती हो। करोना काल में उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रवासियों के साथ की गई ज्यादती, उपेक्षा व अवहेलना के प्रति भी रोष व्यक्त किया गया। समाज की भावना का सम्मान करते हुए अध्यक्ष सच्चिदानंद शर्मा ने कहा कि यह सत्य है कि जब-जब समाज के लोगों पर आपत्ति आई है संगठन और सरकार ने भले ही कोई सहयोग नहीं किया, किंतु हम शांति व अनुशाशन प्रिय लोग संगठित समाज के बल पर देश में मौजूद कानून के आधार पर समाज हितों की लड़ाई लड़ने में सदैव से सक्षम रहे है। उन्होंने कहा कि उनका महासंघ समाज के हर सुख-दु:ख में पूर्व की भांति सदैव तत्पर रहेगा।

उत्तराखण्ड के लोगों को वोट के लिए होता है इस्तेमाल
सभा में संरक्षक मोहन सिंह रावत, दिनेश लखेड़ा, आनंद सिंह रौथाण, महामंत्री जेएन बलोदी, संयोजक केएन डंगवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष टीडी जोशी, पूर्व पार्षद गोपाल करगेती, सागर रावत् लक्ष्मण सिंह रावत, जयपाल पुंडीर, सभासद दीवान सिंह लटवाल, आरपी घिल्डियाल, हेमंत जोशी, डॉक्टर पृथ्वी सिंह केदारखंडी, सीएस रावत, चंदन सिंह गुसाईं, आनंद बल्लभ पांडे, बेलम सिंह रावत, भगत सिंह मंनराल, दर्शन लाल पेटवाल, रामप्रसाद ध्यानी, रश्मि मंमगाई, पूनम शर्मा, भावना बलोदी, हेमलता डबराल आदि ने कहा कि उत्तराखंड के प्रवासियों को यहां दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। इसीलिए राजनैतिक दल उन्हें वोट के रूप में तो इस्लतेमाल तो करते हैं लेकिन जब प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।

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