उत्तराखण्ड में न तो कारोना जांच रिपोर्ट समय पर रही है साथ ही सैम्पिल हो रहे हैें डम्प

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कारोना जांच व्यवस्था में सुधार तथा कन्टेनमेंट बनाने को केन्द्र सरकार के निर्देश लागू करने की मांग
काशीपुर। उत्तराखण्ड में कारोना जांच रिपोर्ट समय पर न आने तथा सैम्पिलों को डम्प रखने तथा जांच अन्यवस्थाओं तथा कन्टेनमेंट क्षेत्र बनाने में केन्द्र सरकार के निर्देशों का पालन न होने की शिकायत राज्य आपदा प्राधिकरण के अध्यक्ष /मुख्यमंत्री को करते हुये समाजसेवी संस्था माकाक्स द्वारा व्यवस्था सुधार की मांग की गयी है। इस शिकायत की प्रति उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव तथा महानिदेशक चिकित्सा को भी ई-मेल से भेजी गयी है।
23 वर्षोंं से अधिक से मानवाधिकार संरक्षण, उपभोक्ता संरक्षण तथा समाज सेवा क्षेत्र में कार्यरत संस्था मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति (माकाक्स) के अध्यक्ष नदीम उद्दीन द्वारा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री व अध्यक्ष राज्य आपदा प्राधिकरण को ई-मेल से प्रेषित शिकायत में नियमानुसार समय से कोरोना जांच न होने तथा करोना नियंत्रण के नाम पर नियम विरूद्घ कन्टेनमेंट जोन बनाकर आम लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त करने तथा केन्द्र सरकार के निर्देशोें का पालन न करने के सम्बन्ध में शिकायत की गयी है और व्यवस्था सुधार को 16 बिन्दुओं पर कार्यवाही की मांग की गयी है ताकि आम लोेगों का जीवन अधिक प्रभावित किये बिना कोरोना महामारी को फैलने से रोका जा सके।
श्री नदीम द्वारा भेजी शिकायत में प्रदेश में कहा गया है कि कारोना संक्रमण दर अत्याधिक न होने पर भी समय से जांच रिपोर्ट नहीं आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग तथा उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुमोदित एस ओ पी के अनुसार सैम्पिल प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा अधिकतम 4 सैन्टीग्रेड तापमान पर सुरक्षित रखकर इसी तापमान पर प्रयोगशाला को परिवहन करके भेजा जाना चाहिये तथा 4 सैन्टीग्रेड तापमान पर ही इसे प्रयोगशाला में सैम्पिल लिये जाने से पांच दिन से कम अवधि तक रखा जा सकता है। पांच या अधिक दिन इस सैम्पिल को शून्य से 70 सैन्टीग्रेड अर्थात -70 सी पर ही रखा जा सकता है। इतने कम तापमान पर सैम्पिल रखने की सुविधा उत्तराखण्ड में उपलब्ध न होने की जानकारी मिली है। इसलिये इस अव्यवस्था में सैम्पिल की रिपोर्ट की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है जो कारोना नियंत्रण व जनहित के प्रतिकूल है। इस व्यवस्था में सुधार हेतु 6 सुझाव दिये गये है। इन सुझावों में अधिकतम 24 घंटे में रिपोर्ट की व्यवस्था करना, अधिक लैब, मशीनें, सपेयर पार्ट्स व स्टाफ प्रशिक्षण की व्यवस्था, सैम्पिल सीधे प्रयोगशाला भेजने की व्यवस्था ताकि निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखा जा सके, सैम्पिल डम्प करने पर पूर्ण रोक लगाना, निर्धारित तापमान पर न रखे गये व उम्प सैम्पिलों की पुन: जांच करना और डम्प सैम्पिलों की रिपोर्ट के मामलों में पुन: सैम्पिल रिपोर्ट आने पर ही कन्टेनमेंट आदि जारी रखना शामिल है।
श्री नदीम द्वारा शिकायत में कन्टेनमेंट व्यवस्था सुधार के लिये 10 बिन्दुओं पर कार्यवाही की मांग की है। इसमें केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप कम से कम 15 पॉजिटिव केस मिलने और कम्युनिटी संचार रोकने के लिये राज्य आपदा प्राधिकरण द्वारा मापदण्ड निर्धारित करने और इनका कड़ाई से पालन करते हुये नियमानुसार जिला आपदा प्राधिकरण की मीटिंग में लिये निर्णय से कन्टेनमेंट जोन बनाना तथा एक या दो घरों के विभिन्न सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कन्टेनमेंट बनाने के स्थान पर केवल उनके वास्तविक सम्पर्क वाले लोगों को उनकी रिपोर्ट आने तक होम कोरंटीन करना तथा नियम विरूद्घ बनाये गये कन्टेनमेंट को तत्काल प्रभाव से समाप्त करना शामिल है।

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