नई दिल्ली, दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में हाईकोर्ट, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 22 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई में कोर्ट की मदद करने के लिए तीन वकीलों को एमिकस क्यूरी नियुक्त करेगी. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है, ऐसे में तीन एमिकस क्यूरी नियुक्त किए जाएंगे. तीनों एमिकस क्यूरी की नियुक्ति 8 मई को होने वाली अगली सुनवाई में होगी.
इस मामले में अरविंद केजरीवाल , मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है. तीनों ने न तो खुद और न ही किसी वकील के जरिये कोई दलील रखने की बात कही है. तीनों ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे सत्याग्रह करेंगे.
बता दें कि, 20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से हटने की अरविंद केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया था. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि मैं इस आरोप से प्रभावित हुए बिना ही अपना फैसला सुनाउंगी, ठीक वैसे ही जैसा कि मैं ने अपने 34 वर्षों के न्यायिक करियर में हमेशा किया है. कोर्ट ने कहा था कि न्यायपालिका और संस्था को ट्रायल पर रखा गया.
जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मैं हिंदी में आदेश जारी करुंगी क्योंकि दलीलें भी हिंदी में दी गयीं. कोर्ट ने कहा कि मैं वो उदाहरण दे रही हूं जहां पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को पहली डेट पर राहत दी गई. कोर्ट ने एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें केजरीवाल के पक्ष में एकतरफा आदेश जारी किया गया.
एमिकस क्यूरी का लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है न्यायालय का मित्र. यह एक निष्पक्ष व्यक्ति या संस्था (अक्सर वकील) होती है, जिसे अदालत द्वारा किसी जटिल, जनहित, या महत्वपूर्ण मामलों में कानूनी सहायता या विशेषज्ञ राय देने के लिए नियुक्त किया जाता है. वे मामले में पक्षकार नहीं होते हैं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने में मदद करते हैं.