नईदिल्ली, रिलायंस समूह के मालिक अनिल अंबानी को बैंक धोखाधड़ी मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अंबनी ने याचिका दायर कर भारतीय रिजर्व बैंक के 2024 के निर्देशों के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और आईडीबीआई बैंक द्वारा उनके ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने पर रोक लगाने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
लाइव लॉ के मुताबिक, पीठ ने पाया कि महाराष्ट्र की बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है, जिसने मूल रूप से एकल पीठ द्वारा दी गई रोक को रद्द कर दिया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का अंबनी द्वारा बैंकों के खिलाफ खातों के वर्गीकरण को लेकर दायर मुकदमे के अंतिम निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पीठ के फैसले के बाद अंबानी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल बैंकों के साथ मामला सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने पीठ से उनका बयान दर्ज करने का अनुरोध किया। हालांकि, बैंकों की समूह की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया और कहा कि इसके कई गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि बयान का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।
बैंकों ने अंबानी को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के बैंक खातों को धोखाधड़ी घोषित करने की मांग की थी। नोटिस को अंबानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट की एकल पीठ के सामने चुनौती दी, जिसके बाद एकल पीठ ने बैंक खातों को बैंक कार्यवाही पर रोक लगा दी। बैंकों ने इसे हाई कोर्ट की अन्य खडंपीठ में चुनौती दी, जिसने 23 फरवरी को एकल खंडपीठ का आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद अंबानी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।