अहमदाबाद, अहमदाबाद से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है, जहां मोटेरा इलाके में आसाराम के आश्रम से जुड़े लंबे समय की कानूनी लड़ाई अब अंतिम मोड़ पर पहुंच गई है. गुजरात हाई कोर्ट ने आश्रम की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी. इससे राज्य सरकार को कानूनी तौर पर एक बड़ी बढ़त मिली है.
इस मामले में, हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि आसाराम एक आदतन अपराधी है, जिसका मतलब है कि उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि वह लगातार कानून तोड़ता रहा है. इस सख्त टिप्पणी के साथ, हाई कोर्ट ने आश्रम द्वारा किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया है.
सरकारी वकील जीएच विर्क ने कोर्ट के सामने दलील देते हुए कहा कि मोटेरा इलाके में आश्रम की जमीन जनहित के लिए बेहद जरूरी है. इस जमीन का इस्तेमाल भविष्य में खेल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए किया जाएगा, खासकर कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक्स जैसे वैश्विक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए, जिनकी योजना राज्य सरकार बना रही है.
सरकारी वकील जीएच विर्क ने आगे जोर देकर कहा कि आश्रम ने इस जमीन का इस्तेमाल कानून का उल्लंघन करते हुए किया था और इस जमीन पर सरकार का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी सभी दलीलों को मान लिया है.
इस फैसले के साथ ही, अब नरेंद्र मोदी स्टेडियम के आसपास अन्य आधुनिक स्टेडियम और खेल सुविधाएं विकसित करने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. 50,000 वर्ग मीटर से ज्यादा की यह कीमती जमीन अब सरकार को वापस मिल जाएगी, जिसका इस्तेमाल एक स्पोर्ट्स सिटी (खेल नगरी) विकसित करने के लिए किया जाएगा.
खास बात यह है कि यह फैसला सिर्फ एक कानूनी जीत ही नहीं है, बल्कि इसे गुजरात में भविष्य के खेल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इसके साथ ही, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक्स की मेजबानी करने के भारत के सपने को भी एक नई दिशा मिल सकती है.