जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : प्रखंड एकेश्वर के अंतर्गत सिमारखाल सहित दर्जनों गांव की पेयजल योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही है। जिसके कारण ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से दम तोड़ रही पेयजल योजनाओं की मरम्मत कर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध करवाए जाने की मांग की है।
एकेश्वर के अंतर्गत सिमारखाल के आसपास के गांवों में विगत वर्ष हर घर जल, हर घर नल योजना के अंतर्गत लाखों रूपए खर्च कर नल तो बिछा दिए, लेकिन मुख्य स्रोतों पर कोई कार्य न होने से नलों में नियमित रूप से पानी नहीं आ रहा है। यही हाल ज्वाल्पा-चौबट्टाखाल पंपिग पेयजल योजना का भी बना हुआ है, पंपिंग योजना भी तकनीकी खामियों व उचित देखरेख के चलते ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ देने में विफल साबित हो रही है। परिणाम स्वरूप सिमारखाल, नौगांवखाल, सुन्ना, हलांई, जणदा देवी समेत कई गांवों में पिछले एक सप्ताह से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। अधिकांश घरों के नल सूखे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो गई है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। सिमारखाल निवासी एवं पूर्व प्रधान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गांवों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। ऐसे में ग्रामीणों को प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे धारे और नौलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई लोगों को रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका कीमती समय और श्रम दोनों व्यर्थ हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। योजनाएं कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं, जबकि आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रही है।