कोरोना काल में हुआ रिवर्स पलायन गांवों के लिए बेहतर

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी। उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग ने कोरोना काल में हुए रिवर्स पलायन को गांवों के लिए बेहतर संकेत बताया है। आयोग का कहना है कि हमें अपनी सोच वैश्विक व नियम कायदे स्थानीय स्तर पर तैयार करने होंगे। रिवर्स पलायन कर गांव आए मजदूर, बेरोजगार व निजी क्षेत्र के प्रवासियों पर विशेष रुप से फोकस किया जाना होगा।
उत्तराखंड में रिवर्स पलायन कर गांव आने वालो में सबसे ज्यादा 39.4 फीसदी प्रवासी निजी क्षेत्र के हैं। इसके बाद 12.9 प्रतिशत विद्यार्थी, 12.1 प्रतिशत गृहणी, 11.1 मजदूर, 5.4 प्रतिशत बेरोजगार, 4 प्रतिशत स्वरोजगार और 3.3 फीसदी प्रवासी तकनीकी क्षेत्र से लौटे हैं। आयोग के शोध अधिकारी डा. गजपाल चंदानी ने कहा कि रिवर्स पलायन पहाड़ के वीरान गांवों के लिए शुभ संकेत है। लेकिन अब हमारे सामने इन प्रवासियों को गांव स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमें विश्व स्तर पर सोचना ओर स्थानीय स्तर पर नियम-कायदे बनाने होंगे। जिससे क्षेत्र, परिस्थिति, जलवायु आदि के अनुरुप रोजगार के अवसर विकसित किए जाने में मदद मिलेगी। साथ ही पर्यावरण को भी सुरक्षित रख पाएंगे। डा. चंदानी ने बताया कि हमें प्राथमिक चरण में मजदूर, बेरोजगार व निजी क्षेत्र से रिवर्स पलायन कर आए प्रवासी ग्रामीणों पर फोकस करना होगा।

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