एलटी व प्रवक्ता के पद सृजित नहीं होने पर जताई नाराजगी

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बागेश्वर। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षण मंच की ऑनलाइन गोष्ठी में संस्कृत के संरक्षण और सम्मान को लेकर मंथन हुआ। वक्ताओं ने एलटी और प्रवक्ता संवर्ग में शिक्षकों के पद सृजित नहीं होने पर नाराजगी जताई। संस्कृत भाषा के समुचित शिक्षण कार्य करवाने के लिए संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई। ऑनलाइन बैठक में मंच के संरक्षक पीसी तिवारी ने कहा कि छठीं से आठवीं तक संस्कृत अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। हाईस्कूल में भी छठें विकल्प के रूप में हजारों छात्र संस्कृत पढ़ते हैं। शिक्षक नहीं होने के कारण हिंदी के शिक्षकों को संस्कृत पढ़ाने के लिए बाध्य किया जा जा रहा हे। यही हालात इंटरमीडिएट में भी हैं। असंगत विषयों के शिक्षकों को संस्कृत की शिक्षा दे रहे हैं। जिसके कारण छात्रों को समुचित ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। प्रांत संयोजक बीडी शर्मा ने कहा कि पूर्व की भांति एलटी संवर्ग में हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी के फॉर्मूले को लागू कर शिक्षकों के अलग-अलग पद सृजित किए जाने चाहिए। डॉ. हरिशंकर डिमरी ने संस्कृत भाषा को रोजगारपरक बनाने की बात कही। डॉ. दीपक नवानी ने हर जिले में संस्कृत शिक्षकों के पद सृजित करने और विद्यालय में सृजित पदों और कार्यरत शिक्षकों की सूचना सार्वजनिक करने की बात कही। मंडल सह संयोजक डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने कहा कि द्वितीय राजभाषा संस्कृत को गौरवमय स्थान दिलाने के लिए संस्कृत भाषाविदों को एक मंच पर आकर निर्णायक संघर्ष करना होगा। जिला संयोजक डॉ. चंद्रशेखर बुधोड़ी, सह संयोजक डॉ. बद्रीप्रसाद सेमवाल, पिंकी पांडेय ने भी संस्कृत के विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दिया। गोष्ठी में दीपक सती, नीलेश कुमार जोशी, पलक तिवारी, हेम उपाध्याय, यशपाल रावत आदि मौजूद थे।

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