ऋषिकेश। सरकारी विद्यालयों की नई समय-सारिणी चिलचिलाती गर्मी में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों पर भारी पड़ रही है। शिक्षा विभाग के आदेशों का असर यह है कि विद्यालयों में कई विद्यार्थी गर्मी के कारण चक्कर खाकर गिर रहे हैं, वहीं छुट्टी के बाद उन्हें तीन से चार किलोमीटर तक तेज धूप में पैदल घर लौटना पड़ रहा है। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-सारिणी मैदानी क्षेत्रों के लिए कष्टकारी साबित हो रही है। नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की छुट्टी अब दोपहर 2:05 बजे हो रही है, जबकि पूर्व में यह समय 1:00 बजे तक सीमित था। अप्रैल और मई के महीनों में पड़ने वाली भीषण गर्मी में यह बदलाव छात्रों की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के कई विद्यार्थी दूर-दराज से पैदल विद्यालय आते-जाते हैं। छुट्टी के समय तेज धूप और उमस में लंबी दूरी तय करना उनके लिए जोखिम भरा बन गया है। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ गई है। गौरतलब है कि हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में छात्रहित को देखते हुए समय-सारिणी में बदलाव किया जा चुका है, लेकिन देहरादून जनपद में अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता अश्विनी गुप्ता ने कहा कि ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी मैदानी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए अनुकूल नहीं है। भीषण गर्मी को देखते हुए विद्यालयों के समय में तत्काल परिवर्तन किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।