पूर्व मंत्री ने टाइगर सफारी पर उठाये सवाल, कहा जल्दबाजी में लिया निर्णय

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कोटड़ीढाक सनेह से हो टाइगर सफारी का संचालन, तभी होगा कोटद्वार का विकास
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। प्रदेश के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि कार्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी सेंटर का संचालन कोटड़ीढांग सनेह से करवाये जाने से ही कोटद्वार सहित पौड़ी गढ़वाल को लाभ होगा और यह कोटद्वार के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। पाखरौ में टाइगर सफारी सेंटर बनाये जाने से कोटद्वार को कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत के द्वारा पाखरौ में टाइगर सफारी संचालन का केन्द्र खोले जाने का निर्णय श्रम विभाग में किये गये 430 करोड़ के घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए जल्दबाजी में लिया गया है। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय विधायक एवं वन मंत्री अभी तक प्रोजेक्ट की लागत ही स्पष्ट नहीं कर पा रहे है। पहले वह प्रोजेक्ट पर 42 करोड़ रूपये खर्च आने की बात कर रहे थे, लेकिन देहरादून पहुंचने के बाद ही 150 करोड़ रूपये बता रहे है। प्रदेश सरकार उक्त प्रोजेक्ट को बिना प्लानिंग के ही धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है।
लोक निर्माण के विश्राम गृह में प्रेस वार्ता करते हुए पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014-15 में टाइगर सफारी के लिए मुख्य संचालन केन्द्र पाखरौ के बदले कोटड़ीढांग सनेह क्षेत्र में करने के लिए नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथोरिटी (एनटीसीए) को प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर वर्ष 2016 में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक एवं वन अधिकारियों द्वारा निरीक्षक कर कोटड़ीढाग सनेह को टाइगर सफारी के लिए उपयुक्त पाया गया था। विभाग की सैद्घान्तिक सहमति के आधार पर प्रदेश सरकार के द्वारा डीपीआर बनाकर प्रस्ताव सम्बधित विभाग को भेज दिया था। उन्होंने कहा कि कार्बेट नेशनल पार्क का अधिकांश भाग जनपद पौड़ी गढ़वाल में है, लेकिन अभी तक पौड़ी जनपद सहित कोटद्वार वासियों को कार्बेट नेशनल पार्क का कोई लाभ नहीं मिल पाया है। पाखरौ में टाइगर सफारी संचालन का केन्द्र बन जाने से अभी भी जनपद वासियों को कोई फायदा नहीं होने वाला है। पूर्व मंत्री ने कहा कि टाइगर सफारी का स्थान व क्षेत्रफल तय करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। जनपद पौड़ी गढ़वाल की जनता एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसरों व आर्थिकी बढ़ाने के लिए कोटड़ीढाक सनेह (पूर्व प्रस्तावित केन्द्र) से ही टाइगर सफारी का संचालन करवाया जाय। क्योंकि टाइगर सफारी का संचालन केन्द्र कोटड़ीढाक सनेह प्रस्तावित होने के कारण ही ग्रास्टनगंज दशहरा मैदान के समीप वर्ष 2016 में हैलीपैड़ का निर्माण करवाया गया था। ताकि दिल्ली से कोटद्वार के छ: घंटों के सफर को मात्र 50 मिनट में तय किया जा सकें। उन्होंने कहा कि पाखरौ गेट को पूर्व की दिशा में ऐसे स्थान पर बनाया जाय, ताकि वर्तमान मोटर मार्ग प्रभावित न हो। वहीं टाइगर सफारी का सीमांकन इस तरह से किया जाना चाहिए कि वर्तमान कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग तथा स्थानीय जनता पर भविष्य में प्रतिकूल असर न पड़े। इस मौके पर महापौर श्रीमती हेमलता नेगी, पूर्व राज्य मंत्री विजय नारायण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. चन्द्रमोहन खर्कवाल, महानगर अध्यक्ष संजय मित्तल, बलवीर सिंह रावत, बंटी भाटिया आदि मौजूद थे।

हितों को साधने का काम कर रहे जनप्रतिनिधि
कोटद्वार। पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय विधायक अपने हितों को साधने का काम कर रहे है। उन्हें जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। जबकि स्वार्थ की राजनीति को छोड़कर जनता के हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ने अपने पौने चार साल के कार्यकाल में कालागढ़-रामनगर मार्ग पर एक भी रूपये का काम नहीं किया है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने इस मार्ग को बनाने का काम शुरू किया था और जहां-जहां जंगली जानवर सड़क से होकर गुजरते है वहां पर एलीवेटेड रोड स्वीकृत की थी। साथ ही कोल्हूचौड़ नदी में 100 मीटर पुल स्वीकृत किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने कांग्रेस सरकार की स्वीकृत विकास कार्यों को ठंडे़ बस्ते में डाल दिया है। वर्तमान सरकार ने कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग को तीन साल तक जीएमओयूलि सहित निजी वाहनों के लिए बंद कर दिया था।

आरबीआई 81 तकनीक से होना था लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग निर्माण
कोटद्वार। पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार ने लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के लिए एक भी रूपया नहीं दिया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उक्त मार्ग निर्माण के लिए लगभग सात करोड़ रूपये स्वीकृत किये थे, उसके अलावा वर्तमान सरकार ने एक भी रूपया उक्त मोटर निर्माण के लिए स्वीकृत नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उक्त मोटर मार्ग को आरबीआई-81 तकनीकी से स्वीकृत था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस पर भी रोक लगा दी।

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