देहरादून। देहरादून में नगर निगम की स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल की वसूली आम नागरिकों से किए जाने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। गुरुवार को संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा रेसकोर्स में आयोजित जन संवाद में विभिन्न सामाजिक संगठनों, आवासीय कल्याण समितियों और नागरिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इस प्रस्ताव को गलत बताया और इसे वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिलों का वर्षों तक भुगतान न होना नगर निगम की वित्तीय और प्रशासनिक विफलता है। निगम को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बड़े बकाएदारों से वसूली करनी चाहिए और बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
प्रतिभागियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि शहर के कई वार्डों में खराब स्विचों के कारण स्ट्रीट लाइटें दिनभर जलती रहती हैं, जिससे बिजली की अनावश्यक खपत बढ़ रही है। इसे तत्काल दुरुस्त करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि आम जनता पहले ही गृहकर, यूजर चार्ज और पार्किंग शुल्क जैसे कई करों का भुगतान कर रही है। ऐसे में नगर निगम की पुरानी देनदारियों का बोझ “सरचार्ज” के रूप में नागरिकों पर डालना उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की भावना के खिलाफ है। जन संवाद में सुझाव दिया गया कि नगर निगम को बकाया भुगतान के लिए राज्य सरकार से विशेष बजट की मांग करनी चाहिए, न कि जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना चाहिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि संयुक्त नागरिक संगठन का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मेयर, शहरी विकास सचिव और मुख्य सचिव से मिलकर प्रस्तावित सरचार्ज के विरोध में ज्ञापन सौंपेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) केजी बहल ने की, जबकि संचालन संगठन सचिव सुशील कुमार त्यागी ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।