संक्रमित राज्यों से मुर्गियों, चूजों और अंडों की आपूर्ति पर रोक

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देहरादून। उत्तराखंड में बर्ड फ्लू से सुरक्षा के लिए पशुपालन विभाग ने संक्रमित राज्यों से मुर्गियों, चूजों और अंडों की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण मिलने पर अंडों व मुर्गियों की खरीद बंद कर दी जाएगी। उत्तराखंड में बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। अब पशुपालन विभाग ने बर्ड फ्लू संक्रमित राज्यों से प्रदेश में मुर्गियों, चूजों व अंडों की आपूर्ति पर रोक लगा दी है ताकि प्रदेश में बर्ड फ्लू न फैल सके।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बर्ड फ्लू को लेकर नियमित रूप से निगरानी की जा रही रही है। अभी तक किसी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू रोग के लक्षण नहीं मिले हैं। एहतियात के तौर पर संक्रमित राज्यों से अंडों, मुर्गियों व चूजों की आपूर्ति को प्रतिबंध किया गया है। बर्ड फ्लू की जांच के लिए जिला व ब्लाक स्तर पर सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। कई राज्यों में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद उत्तराखंड भी अलर्ट मोड में आ गया है। देहरादून में जिला प्रशासन ने बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए सभी छह ब्लॉक में चार-चार अधिकारियों की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) का गठन किया है। यह टीम दून के करीब 80 पोल्ट्री फार्म पर सघन नजर रखेगी। किसी भी तरह की संदिग्ध स्थिति पाए जाने पर उसकी सूचना मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में बनाए गए कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
बर्ड फ्लू को लेकर जिला प्रशासन इसलिए भी चिंतित दिख रहा है, क्योंकि दून के पोल्ट्री फार्मों के अलावा छोटे स्तर पर भी करीब 5.18 लाख मुर्गे व मुर्गियों का पालन किया जा रहा है। एक फार्म या प्रतिष्ठान में 500 से लेकर 40 हजार तक मुर्गे-मुर्गियां हैं। लिहाजा, संख्या के हिसाब से सतर्कता भी उतनी ही अधिक बरतने की जरूरत है।
विकासनगर क्षेत्र के आसन वेटलैंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का आवागमन होता है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन की नजर यहां पर भी है। बुधवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसबी पांडे ने वन विभाग की टीम के साथ आसन वेटलैंड का दौरा किया। उन्होंने देखा कि कहीं यहां पक्षियों की मौत तो नहीं हो रही। फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं पाई गई। दूसरी तरफ डाकपत्थर बैराज व ऋषिकेश के चीला बैराज क्षेत्र में भी अधिकारी सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे हैं।

 

देहरादून में लगातार अलग-अलग जगहों पर मृत कौए मिल रहे
देहरादून। देहरादून में लगातार अलग-अलग जगहों पर मृत कौए मिल रहे हैं। एक ओर जहां भंडारी बाग में करीब दो सौ से ज्यादा कौए मृत मिलने से वन विभाग की टीम में हड़कंप मच गया। वहीं, गांधी ग्राम में छह और बंगाली कोठी के पास भी चार कौए मृत पाए गए हैं। प्रभागीय वन अधिकारी राजीव धीमान ने बताया कि बर्ड फ्लू की आशंका के चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। विभाग की टीम ने पीपीई किट पहनकर शव कब्जे में ले लिए हैं।
देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद अन्य राज्य अलर्ट मोड पर हैं। उत्तराखंड में भी इसे लेकर पूरी एहतियात बरती जा रही है। हालांकि, अभी राज्य में बर्ड फ्लू के किसी भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है। पर इस बीच देहरादून के भंडारी बाग में दर्जनों कौए मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। टीम ने शव कब्जे में ले लिए हैं और उन्हें मालसी रेंज में जलाया जाएगा।
भंडारी बाग परिसर में वन विभाग की टीम को करीब 200 कौए मृत मिले हैं। हालांकि, दो दिन पहले भी यहीं पास में दो कौए मृत मिले थे, जिनके सैंपल भोपाल भेजे जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक बाग में मिले मृत कौओं के शव सड़ चुके हैं। उनकी कई दिन पहले ही मौत हो चुकी है। प्रभागीय वन अधिकारी राजीव धीमान ने बताया कि बर्ड फ्लू की आशंका के चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। विभाग की टीम ने पीपीई किट पहनकर शव कब्जे में ले लिए हैं। भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही बर्ड फ्लू को लेकर स्थिति साफ हो पाएगी।

डब्ल्यूआइआइ के विज्ञानी भी अलर्ट मोड में
देहरादून। विभिन्न राज्यों में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के विज्ञानी भी अलर्ट मोड में आ गए हैं। अभी भले ही वह सीधे तौर पर बर्ड फ्लू के शोध संबंधी गतिविधि से नहीं जुड़ पाए हैं, मगर भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
डब्ल्यूआइआइ के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. एस सत्यकुमार का कहना है कि बर्ड फ्लू का जितना खतरा मुर्गियों और बतखों पर मंडरा रहा है, उतना ही खतरा वन्य पक्षियों पर भी बना है। डॉ. सत्यकुमार के मुताबिक अभी किसी वन्य पक्षी में बर्ड फ्लू के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, कुछ जगहों से पक्षियों के मरने की जानकारी जरूर मिल रही है। यदि यह बीमारी वन्य पक्षियों में देखने को मिली तो इसका व्यापक असर हो सकता है।
उधर, संस्थान के ही वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. वाईवी झाला इस आशंका से भी इन्कार नहीं करते हैं कि यह बीमारी पक्षियों के अलावा अन्य वन्यजीवों में नहीं हो सकती है। उनका कहना है कि यह मुर्गियों और बतख से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर सकती है तो संक्रमित वन्य पक्षियों का शिकार करने के बाद संबंधित जानवर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह बात और है कि अभी इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है। फिर भी सभी तरह की सूचनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।
देहरादून के मालसी स्थित देहरादून जू में बर्ड फ्लू के अलर्ट के बाद चिकन और अंडा बंद कर दिया गया है। हालांकि, यहां चिकन बेहद कम मात्रा में ही मंगाया जाता था। जू के चिकित्सक राकेश नौटियाल ने बताया कि विश्व में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद यहां करीब एक सप्ताह पूर्व चिकन और अंडा बंद कर दिया गया था। बताया कि गुलदार और मगरमच्छ समेत अन्य मांसाहारी जीवों को मटन और बीफ ही अधिक दिया जाता है। चिकन बेहद कम मात्रा में मंगाया जाता है। इसके अलावा अंडा भी पक्षियों में कैल्सियम और प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए मंगाया जाता था।

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