भर्ती घोटाले के बाद अध्यक्ष एस राजू ने दिया इस्तीफा, कहा- मेरा किसी नेता से नहीं है रिश्घ्ता

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देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने अपने पद से त्यागपत्र दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग की पिछले महीने और पहले भी इस तरह के मामले सामने आए। जिसकी वह नैतिक जिम्मेदारी लेते है। उन्घ्होंने कहा कि मेरा किसी नेता से रिश्घ्ता नहीं है। मैं मानता हूं र्केडिडेट्स को परेशानी हुई है।
उत्तराखंड राज्य बेरोजगार संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चार और पांच दिसंबर 2021 को आयोजित विभिन्न पदों के लिए भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितता के संबंध में मुख्यमंत्री धामी को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी अशोक कुमार को परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी किए थे। इस मामले में थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच उत्तराखंड एसटीएफ कर रही है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तर की परीक्षा के पेपर लीक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ग ने बीती मंगलवार को नैनीताल जिले के रामनगर से एक और न्यायिक कर्मचारी को गिरफ्तार किया ।
इससे पहले एसटीएफ ने नैनीताल से एक न्यायिक कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में एसटीएफ अब तक तीन न्यायिक कर्मचारी, एक पुलिस कर्मचारी और दो उपनल कर्मियों सहित 13 आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने कुछ दिन पहले पेपर प्रिंट करने वाली लखनऊ की प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी को गिरफ्तार किया ।
आरोपित ने पेपर सेट का फोटो खींचकर टेलीग्राम एप के माध्यम से लीक किया था। इसके लिए उसे 36 लाख रुपये दिए गए थे। इस मामले में अब तक 13 आरोपितों को एसटीएफ गिरफ्तार कर चुकी है।
कांग्रेस ने प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर सरकार पर हमला बोला था। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आरोप लगाया था कि उत्तराखंड में भी भर्तियों में बंगाल की भांति खेल किया जा रहा है। भाजपा सरकार भर्तियों में जमकर कट ले रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा था उत्तराखंड में भर्ती घोटालों की लंबी सूची है। सच को सामने लाने के लिए सीबीआइ जांच होनी चाहिए।
बता दें कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पहले चेयरमैन रहे डा आरबीएस रावत ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था। वे डेढ़ साल तक आयोग के चेयरमैन रहे। उन्घ्होंने प्रदेश में पूर्व पीसीसीएफ की जिम्मेदारी संभाली थी।

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