लैंसडौंन का नाम बदलने के प्रस्ताव का हर स्तर पर हो रहा है विरोध

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जयन्त प्रतिनिधि।
लैंसडौन : भातरीय जनता पार्टी के विधायक दिलीप रावत ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस कदम पर फिर से विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुझे पता चला है कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में मौजूद लैंसडौंन कैंटोनमेंट बोर्ड का नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लैंसडौंन पर्यटन स्थल के रूप में विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। इससे स्थानीय निवासियों को आर्थिक लाभ मिलता है। विधायक ने कहा कि अगर इस पर्यटन स्थल का नाम बदला जाता है, तो इससे क्षेत्र में पर्यटन की पहचान और लोकप्रियता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जो उत्तराखंड के हित में नहीं होगा। कहा कि “हमारे क्षेत्र की पहचान लैंसडौंन नाम से जुड़ी है, इसलिए इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
कैंटोनमेंट बोर्ड का प्रस्ताव है कि इस हिल स्टेशन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ रखा जाए। यह नाम राइफलमैन जसवंत सिंह रावत (महावीर चक्र विजेता) के नाम पर रखा गया है, जो 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के नायकों में से एक थे। 1887 में स्थापित लैंसडौन छावनी 1503.83 एकड़ में फैली हुई है। इसमें करीब 3141 आबादी है और 2526 सैन्यकर्मी हैं। हेनरी चाल्र्स कीथ पेटी-फिट्जमौरिस, पांचवें माक्र्वेस ऑफ लैंसडौन, एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने 1888 से 1894 तक भारत के वायसराय के रूप में काम किया। 21 सितंबर, 1890 को, कालौडांडा नाम के वन क्षेत्र का नाम वायसराय के नाम पर लैंसडौंन रखा गया। 2023 में जब यह प्रस्ताव पेश किया गया था, तब लैंसडाउन होटल एसोसिएशन ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही थी, उनका तर्क था कि नाम में बदलाव से पर्यटन और शहर की पहचान पर असर पड़ेगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद विधायक रावत ने भी असहमति व्यक्त की थी। केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर कैंटोनमेंट लैंसडौंन शहर का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एक सूत्र ने दैनिक जयन्त को बताया कि यह पहल पीएमओ द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य शहर से जुड़ी औपनिवेशिक विरासत को मिटाना था। बोर्ड के सीईओ हर्षित राज सिंह ने बताया कि यह प्रस्ताव पहले 2023 में उठाया गया था और पारित भी हुआ था, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में बोर्ड ने प्रस्ताव को मंत्रालय को भेज दिया है और अब फैसले का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमने जनता से प्रतिक्रिया और आपत्तियां मांगी हैं। हमें अनौपचारिक क्षेत्रों से भी कुछ आपत्तियां मिली हैं।

कैंटोनमेंट बोर्ड का यह है प्रस्ताव
कैंटोनमेंट बोर्ड का प्रस्ताव है कि इस हिल स्टेशन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ रखा जाए। यह नाम राइफलमैन जसवंत सिंह रावत (महावीर चक्र विजेता) के नाम पर रखा गया है, जो 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के नायकों में से एक थे। चीनी सेना के लगातार हमलों के कारण उनकी कंपनी को पीछे हटना पड़ा, लेकिन अकेले राइफलमैन जसवंत सिंह रावत अपनी चौकी पर डटे रहे। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, दो स्थानीय लड़कियों ने उनकी मदद की। इनमें से एक मारी गई और दूसरी को बंदी बना लिया गया। राइफलमैन जसवंत सिंह ने लगातार चीनी हमलों को तब तक रोके रखा जब तक कि वे शहीद नहीं हो गए।

मंगलवार को सदर बाजार रहा पूर्ण रूप से बंद
व्यापार मंडल लैंसडौंन, होटल एसोसिएशन विभिन्न सामाजिक सगठनों ने लैंसडौंन का नाम परिवर्तन करने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की जताई। कांग्रेसी नेता हितेश शर्मा का कहना है लैंसडौंन शहर के विकास पर ध्यान दिया जाए और अंग्रेजों के जमाने के कानूनो को हटाया जाए। मंगलवार को लैंसडौंन का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में सदर बाजार पूर्ण रूप से बंद रहा। गांधी चौक पर विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, कांग्रेस वरिष्ठ नेता रघुवीर सिंह बिष्ट, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य व्यापारी मौजूद रहे।

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