उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन करना तक भूले

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चमोली। चमोली के शिक्षा अधिकारी चहेते शिक्षकों पर इतने मेहरबान हैं कि उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन करना तक भूल गए हैं। शिक्षा महानिदेशक की ऑनलाइन बैठक, शिक्षा निदेशक की ओर से कार्यवृत्त आदेश जारी करने और ई-मेल भेजे जाने के बाद भी आदेशों पर अमल नहीं किया जा रहा है। एक माह बाद भी कार्रवाई न होने से शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में है। दरअसल, 29 जून को शिक्षा महानिदेशक ने मंडलीय, जनपदीय व विकासखंड अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक ली थी। तब आदेश जारी किए गए थे कि विकासखंड स्तर पर एक ही शिक्षा अधिकारी कार्यरत है तो बीईओ व डिप्टी बीईओ का कार्य भी उसी अधिकारी को दिया जाए। चूंकि अधिकतर विकासखंडों में प्रधानाचार्य खंड शिक्षा अधिकारी के प्रभार पर हैं। मामले में तर्क दिया गया था कि प्रधानाचार्य अकादमिक पद है। इनके पास खंड शिक्षा अधिकारियों का अतिरिक्त चार्ज दिए जाने से शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। छह जुलाई को निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने यह पत्र जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया। यही नहीं सात जुलाई को शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों व रमसा के ई-मेल पर यह आदेश जारी किया। परंतु चमोली जिले में इन आदेशों पर एक माह बाद भी अमल नहीं हो पा रहा है। जिले में नारायणबगड़, जोशीमठ, कर्णप्रयाग व पोखरी में अधिकारी होने के बावजूद लंबे समय से प्रधानाचार्यों के पास बीईओ का प्रभार सौंपा गया है। मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी ललितमोहन चमोला के अपने ही तर्क हैं। दूरभाष पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लॉकडाउन के चलते प्रधानाचार्यों के पास पढ़ाई की जिम्मेदारी नहीं है। उनका कहना है कि शिक्षा महानिदेशक का पत्र आफिसियल रूप से उनके पास नहीं आया है। इस बारे में क्वारी की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसफर, गेस्ट टीचरों की नियुक्तियां होनी हैं, उसके बाद इस मामले को देखा जाएगा।

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