बेस अस्पताल में कम्प्यूटराइज्ड टेस्टिंग बताएगी क्या है चश्मे का नंबर

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल में आंखों की जांच के लिए ऑटो रिफेक्टर मीटर यूनिट स्थापित की जा रही है। यूनिट के संचालन के लिए एक नई मशीन अस्पताल को मिल गई है। इस मशीन से चश्में का नंबर और पर्दें की जांच की जाएगी। अन्य मशीनों के जल्द मिलने की संभावना है।
इसी मशीन से आंखों की जांच होगी। बेस अस्पताल में पहले मैन्युअली काम होता था। चश्मे का नंबर भी हाथ से लिखकर दिया जाता था। अब मशीन के माध्यम से चश्मे का नंबर दे दिया जाएगा। अस्पताल को राष्ट्रीय दृष्टि विहीनता निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत आटो किरोमीटर मशीन मिली है। डॉक्टर ने बताया कि हमारी आंख एक गुब्बारे की तरह होती है। इसमें एक तरल पदार्थ भरा होता है। जो लगातार आंखों के अंदर बनता और बाहर निकलता रहता है। आंखों में ऑप्टिक नर्व भी होती हैं। इनकी मदद से किसी वस्तु के बारे में संकेत दिमाग को मिलता है। आंखों पर बढ़ा दबाव इन ऑप्टिक नर्व को डैमेज करने लगता है और आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। अगर शुरू में ही पता न चले तो यह मर्ज धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है। यही कारण है कि ग्लूकोमा को ‘दृष्टि का अदृश्य चोर’ व आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। अब नई मशीनें आने से मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। बेस अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में राष्ट्रीय दृष्टि विहीनता निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत ऑटो रिफेक्टर मीटर यूनिट स्थापित की जा रही है। आटो किरोमीटर मशीन अस्पताल को मिल गई है। इस मशीन की लागत एक लाख रूपये से अधिक है। इस मशीन से चश्में का नंबर और पर्दें की जांच की जाएगी। ऑटो किरोमीटर से पुतली का साइज देखा जाता है। उन्होंने बताया कि ऑटो रिफेक्टोमीटर का स्टैण्ड और सिल्प लैंप भी मिल गया है। जल्द ही यूनिट स्थापित करने के लिए अन्य मशीनें भी उपलब्ध हो जाएगी।

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