नई टिहरी। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव या मरीज को समय पर सही उपचार नहीं मिलने के कारण यहां सालभर में ही पांच गर्भवती महिलाओं को अपनी जान गवांनी पड़ी है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। पांच मई को पोखार निवासी एक गर्भवती महिला की मौत के बाद फिर से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल उठाए गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इसके कई कारण गिनाते हुए मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी को ही मुख्य कारण बताया है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग चलती आ रही है। तमाम प्रयासों के बाद स्वास्थ्य उपकरण और चिकित्सकों की तैनाती के बाद भी मरीज को रेफर करने की परंपरा नहीं टूट पा रही है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जिले में स्वीकृत 234 चिकित्सकों के सापेक्ष 204 चिकित्सक कार्यरत हैं। अभी ईएनटी और रेडियोलॉजिस्ट के पद रिक्त हैं बावजूद इस महीने ईएनटी विशेषज्ञ मिलने की उम्मीद है। रेडियोलॉजिस्ट का जिला अस्पताल, नरेंद्रनगर, बेलेश्वर, हिंडोलाखाल और देवप्रयाग में रोस्टर बनाया गया है। बावजूद अगस्त 2025 से अभी तक पांच गर्भवती महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए हैं। सभी मामलों में सीएचसी से रेफर करने के कुछ घंटे बाद ही मौत की सूचना मिली है। स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार किए जा रहे सुधार के बावजूद गर्भवती महिलाओं की मौत पर सीएमओ डॉ. श्याम विजय ने कहा कि पोखार निवासी आरती की मौत के बाद जो स्थिति सामने आई है उस स्थिति में मौत का कारण गर्भ ट्यूब में विकसित होना भी हो सकता है। बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। जबकि अन्य मामलों में गर्भवती महिलाओं का मौत का कारण हाइपरटेंशन, रक्त वाहिनी में खून जमने, ब्लड प्रेशर बढ़ने और उनमें एक महिला की तो ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। पोखार की आरती मामले में भी परिजन प्राइवेट क्लीनिक ले जाने के बजाए पहले ही उसे सीएचसी बेलेश्वर में भर्ती कराना चाहिए था।