नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित को 20 वर्ष का कारावास

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी।
विशेष सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के मामले में नेपाली मूल के आरोपित युवक को दोष सिद्ध पाते हुए 20 वर्ष सश्रम कारावास व 30 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थ दंड न भुगतने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा आरोपित को गृहभेदन का दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष के कारावास व पांच हजार अर्थ दंड भी लगाया गया है। अर्थ दंड न भुगतने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। उक्त सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर के रूप में चार लाख की धनराशि दिए जाने के लिए राज्य को निर्देशित किया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पोक्सो विजेंद्र सिंह ने बताया कि बीते वर्ष 11 मई को कोतवाली पौड़ी में नाबालिग से दुराचार के आरोप में पोक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। नेपाली मूल के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत की थी कि बबलू बूढ़ा उर्फ दल बहादुर ने रात को उनके घर में घुस कर घर के दूसरे कमरे में अकेली सो रही नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किया। बेटी के चिल्लाने पर जब स्वजन उठे तो बबलू भाग गया। स्वजनों के पूछने पर नाबालिग ने दुष्कर्म की बात बताई। पिता की शिकायत पर पौड़ी कोतवाली पुलिस ने बबलू के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज गिरफ्तार किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश सिंकद कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया। आरोपित बबलू को सभी मामलों में दोष सिद्ध पाते हुए पोक्सो के तहत 20 वर्ष का कारावास व 30 हजार का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न भुगतने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा आरोपित को गृह भेदन का भी दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष का कारावास व 5 हजार का अर्थ दंड लगाया गया। अर्थदंड न भुगतने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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