नईदिल्ली,सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को जमानत देते हुए अपने ही पूर्व के फैसले पर असहमति जताई। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए यूएपीए के मामले में उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाला फैसला ठीक नहीं था। पीठ ने कहा कि यूएपीए मामलों में भी जमानत नियम होना चाहिए और जेल अपवाद होना चाहिए।
दरअसल, सोमवार को पीठ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अंद्राबी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के नार्को-आतंकवाद मामले में जून 2020 से जेल में है। इसी दौरान, पीठ ने ऐतिहासिक यूनियन ऑफ इंडिया बनाम केए नजीब मामले की याद दिलाया और कहाकि 2021 में 3 जजों की पीठ ने कहा था, अगर यूएपीए केस में मुकदमा देर तक नहीं चलता, तो लंबे समय तक जेल में रखना गलत है।
सुप्रीम कोर्ट की 3 न्यायाधीशों की पीठ ने 2021 के नजीब मामले में, केरल के प्रोफेसर के मामले में 2015 से जेल में बंद एक आरोपी को मिली जमानत को बरकरार रखते हुए माना था कि त्वरित सुनवाई के अधिकार जैसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन यूएपीए जैसे कानून के तहत भी जमानत देने का आधार हो सकता है। तब कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद-21 के तहत त्वरित सुनवाई का अधिकार और संबंधित अधिकार यूएपीए आरोपियों पर भी लागू होंगे।
इस साल जनवरी में, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की पीठ ने मुकदमे की कार्यवाही में देरी के आधार पर उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि आतंकवाद के मामलों में भी जमानत सामान्य सिद्धांत होना चाहिए, और बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल नहीं रखा जा सकता। बता दें कि खालिद और इमाम दिल्ली दंगा मामले में 5 साल से जेल में बंद हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अंद्राबी और अन्य, जिनके लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के पाकिस्तान स्थित संचालकों से संबंध हैं। आरोप है कि वे भारत में आतंकवादी गतिविधियों को वित्त पोषित करने के लिए सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी का रैकेट चला रहे थे। इससे पहले, एनआईए अदालत और जम्मू -कश्मीर हाई कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सोमवार को कोर्ट ने कहा कि अंद्राबी को एनआईए अदालत की शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाए।