प्रशासन की अनदेखी पर भड़के हर्षिल के ग्रामीण

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उत्तरकाशी। आपदा के करीब नौ माह बाद हर्षिल गांव की सुरक्षा के लिए कार्य शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर्षिल में झील के आगे नदी को गलत तरीके से चैनालाइज किया गया है। इससे बरसात में हर्षिल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही सिंचाई विभाग की ओर से सुरक्षात्मक कार्यों के लिए जारी निविदा को भी निरस्त कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं होते हैं तो आगामी 19 अप्रैल को गंगोत्री हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा। बीते अगस्त माह में आई आपदा में तेलगाड़ में आए मलबे के कारण भागीरथी नदी में झील बन गई थी। साथ ही हर्षिल में नदी किनारे की भूमि और संपत्तियों पर कटाव होने के कारण नुकसान हुआ था। ग्राम प्रधान सुचिता रौतेला, अरविंद बुटोला, जयवीर नेगी, दिनेश रावत ने कहा कि प्रशासन की ओर से सिंचाई विभाग ने वहां पर मात्र नदी को चैनालाइज करने का कार्य किया है लेकिन उसमें योजनागत कार्य न होने के कारण न ही झील का जलस्तर कम हुआ है। साथ ही नदी के किनारे जमा मलबा बरसात में दोबारा नदी को रोकने का कार्य करेगा। इससे झील का जलस्तर बढ़ने के कारण वह हर्षिल में सेब के बगीचों सहित आवासीय भवनों, जीएमवीएन, थाने और सरकारी भवनों सहित बाजार में नदी के पानी घुसने का खतरा बना है। शासन की ओर से सुरक्षात्मक कार्यों के लिए स्वीकृति दी थी।
उसके बाद सिंचाई विभाग ने निविदाएं आमंत्रित की लेकिन उन्हें भी अब निरस्त कर दिया गया है। वहीं बरसात अब कुछ माह बाद शुरू हो जाएगी। प्रशासन से कई बार सुरक्षा की मांग की गई। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसलिए जल्द ही ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं होती। तो आगामी 19 अप्रैल को गंगोत्री हाईवे पर जाम लगाया जाएगा।

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