जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कोटद्वार की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश नगर पंचायत बढ़ापुर की 125 ग्राम पंचायतों ने उन्हें उत्तराखंड में शामिल करने की मांग की है। कहा कि उत्तर प्रदेश की अंतिम सीमा पर होने के कारण उन्हें बेहतर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही तहसील व प्रशासन से संबंधित कार्यों को पूर्ण करने के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर दूर चक्कर काटने पड़ते हैं।
इस संबंध में सीमावर्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनमोहन दुदपुड़ी ने उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण पर पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए उत्तराखंड राज्य का गठन किया गया था। इसके लिए कोटद्वार से सटे 125 गांव में रहने वाले ग्रामीणों ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन, राज्य गठन के बाद उनकी अनदेखी की गई है। उत्तर प्रदेश सीमा के अंतिम गांव होने के कारण उन्हें बेहतर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। साथ ही उन्हें तहसील में छोटे कार्य के लिए नजीबाबाद व धामपुर 35 किलोमीटर के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका धन व समय दोनों बर्बाद होता है। कहा कि इन गांव में रहने वाले 75 प्रतिशत जनसंख्या पहाड़ के लोगों की है, जो अपने दैनिक उपयोग की खरीददारी करने के लिए कोटद्वार आते हैं। सीमा का अंतिम गांव होने के कारण परिवारों को बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी जूझना पड़ता है। कहा कि परिवार बैंक, ट्रेजरी, गैस डीपीडीओ, सीएचएस स्वास्थ्य सेवा व कैंटीन सेवाओं के लिए कोटद्वार व काशीपुर पर निर्भर हैं। ऐसे में वह चाहते हैं कि उन्हें पूरी तरह उत्तराखंड में ही शामिल किया जाए।