जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन बेस अस्पताल में बंदरों के काटने से घायल हुए लोग पहुंच रहे हैं। बंदरों के आतंक से निजात दिलवाने के लिए कुछ माह पूर्व नगर निगम ने उन्हें पकड़ने के लिए अभियान चलाया था। लेकिन, अब वन विभाग के जिन बाड़ों में बंदरों को छोड़ा जाता था, वह बाड़े फुल हो चुके है। ऐसे में वन विभाग ने निगम की ओर से पकड़े जाने वाले बंदरों को बाड़े में रखने से इंकार कर दिया है।
कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा वार्ड हो जहां उत्पाती बंदर के झुंड न दिखाई दें। हालात यह हैं कि दिन हो अथवा रात, बंदरों का शोर हर वक्त सुनाई देता है। बंदरों के कारण वार्डवासियों का अपने घरों की छत पर कपड़े व अनाज सुखाना भी मुश्किल हो गया है। संपन्न लोगों ने छत को टिन शेड व जालियों से कवर कर दिया है, ताकि बंदर नुकसान न कर पाए। बंदरों के डर से बच्चों ने घर के बाहर खेलना भी छोड़ दिया है। राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार में भी प्रतिदिन दो-तीन ऐसे मामले आते हैं, जो बंदरों के हमले में घायल होते हैं। क्षेत्र में बंदरों की इस समस्या को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने बंदरों को पकड़ने के लिए बाकायदा अभियान भी चलाया। अभियान के तहत अलग-अलग वार्डों से बंदरों को पकड़ उन्हें वन विभाग के बाड़ों में छोड़ दिया गया। लेकिन, अब वन विभाग के बाड़ों में क्षमता से अधिक बंदर रख दिए गए हैं। जिस कारण महकमे ने बंदर रखने से इंकार कर दिया है। वन विभाग की इंकार के बाद अब नगर निगम ने भी फिलहाल बंदर पकड़ने की मुहिम रोक दी है।