गरुड़ में बुनियादी सुविधाओं का गहराता संकट, तहसील दिवस में प्रशासन सख्त

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बागेश्वर। जनपद के गरुड़ तहसील क्षेत्र में इन दिनों मूलभूत सुविधाओं का संकट गहराता जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। एक ओर जहां तहसील दिवस के अवसर पर प्रशासनिक सक्रियता और सख्ती स्पष्ट रूप से देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान को लेकर जनता में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। 21 अप्रैल को आयोजित तहसील दिवस में उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल, तहसीलदार निशा रानी एवं नायब तहसीलदार भोपाल गिरी की उपस्थिति में जनसमस्याओं की सुनवाई की गई। इस दौरान पूर्व में प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों से आख्या तलब की गई तथा लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम में अनुपस्थित पाए गए पेयजल निगम, कृषि विभाग एवं अग्निशमन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिससे प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मंशा स्पष्ट हुई। इसके समानांतर, क्षेत्र में ईंधन और गैस आपूर्ति की गंभीर समस्या उभरकर सामने आई है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के गरुड़ ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश कोरंगा द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में पेट्रोल, डीजल तथा घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में अनियमितताओं को रेखांकित किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि लंबे समय से पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण शादी-विवाह, कृषि कार्य और पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। विशेष रूप से काश्तकारों को डीजल की कमी के कारण कृषि उपकरणों के संचालन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट, एएनएम, नर्स एवं वार्ड बॉय की भारी कमी के चलते ग्रामीणों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर ही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है, जिस पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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