काशीपुर। बाजपुर और गदरपुर क्षेत्र में बुक्सा जनजाति की जमीनों पर कथित अवैध कब्जों के मामलों में गुरुवार को पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने बाजपुर पहुंचे एडीएम कौस्तुभ मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि तहसील बाजपुर और गदरपुर क्षेत्र की जनजातीय कृषि भूमि को नियमों के विपरीत सामान्य वर्ग के लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जेड ए एंड एलआर एक्ट की धाराओं का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों से मिलीभगत कर बुक्सा समाज की जमीनों पर अवैध कब्जे कराए गए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा दिए गए आदेशों का भी अब तक पालन नहीं हुआ। उनका कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते मामलों को दबाया जा रहा है। पीड़ितों ने कहा कि प्रभावशाली लोग बुक्सा समाज के लोगों को डराकर जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहे हैं। ज्ञापन में ग्राम नन्दपुर, मझरा हसन, बांसखेड़ा, कुल्हा, भीकमपुरी, चन्दायत और धीमरखेड़ा की विवादित भूमि की जांच कर पत्रावलियां तलब करने तथा विशेष जांच समिति गठित करने की मांग की गई। यहां सोमल सिंह, एडवोकेट कृष्णा सिंह, कर्म सिंह, विनोद सिंह, पूरन सिंह, प्रीतम सिंह, लाखन सिंह, स्वरूप सिंह, हरि सिंह, जीत सिंह आदि अनेकों लोग मौजूद रहे।
दो नेताओं पर लगाया जमीन हड़पने के आरोप
बाजपुर। जनजाति समाज के पूरन सिंह ने गुरुवार को एसडीएम कोर्ट पहुंचकर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पवन शर्मा और विधायक प्रतिनिधि डीके जोशी पर ग्राम भीकमपुरी स्थित उनकी ढाई एकड़ जमीन हड़पने का आरोप लगाया। समाज के लोगों के साथ पहुंचे पूरन सिंह ने मीडिया के सामने कहा कि वह अपनी जमीन वापस पाने के लिए लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिला है। वहीं कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पवन शर्मा ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने उक्त जमीन तहसील में हुई सरकारी नीलामी के दौरान खरीदी थी और बाद में उसे आशा जोशी को बेच दिया था। उन्होंने कहा कि यह विधायक को बदनाम करने की साजिश है। उधर, विधायक प्रतिनिधि डीके जोशी ने भी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीन सरकार द्वारा नीलाम की गई थी और पूरन सिंह से उनका कोई संबंध नहीं है।